नई दिल्ली। संसद की एक समिति निजी एयरलाइनों और विमानन नियामक के शीर्ष अधिकारियों को तलब कर सकती है, क्योंकि इंडिगो की सैकड़ों उड़ानें रद्द होने की वजह से देशभर में हवाई अड्डे पर हजारों यात्री फंसे हुए हैं।
परिवहन, पर्यटन और संस्कृति पर संसद की स्थायी समिति एयरलाइनों के शीर्ष अधिकारियों और विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) और विमानन मंत्रालय के अधिकारियों से हवाई सेवाओं में व्यवधान के कारण और समाधान के बारे में स्पष्टीकरण मांग सकती है।
समिति के एक सदस्य ने कहा कि समिति नें हवाई सेवाओं में व्यवधान के कारण हजारों यात्रियों को हुई परेशानियों को गंभीरता से लिया है। सदस्य ने बताया कि संसद के शीतकालीन सत्र के लिए राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद सांसदों को भी इंडिगो की उड़ान रद्द होने और अन्य एयरलाइनों की देरी का सामना करना पड़ा। कई सांसदों से लोगों ने शिकायत की कि इस स्थिति के कारण हवाई किराया काफी बढ़ गया है।
इसी बीच, माकपा के राज्यसभा सद्य जॉन ब्रिटास ने बड़ी संख्या में उड़ानों में व्यवधान की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) बनाने या न्यायिक जांच की मांग की है। इंडिगो ने रविवार को दिल्ली और मुंबई के हवाई अड्डों से 220 से अधिक उड़ानें रद्द की। उड़ानों में यह व्यवधान छठे दिन में प्रवेश कर चुका है। उड़ानों के संचालन को सामान्य करने के प्रयास जारी हैं।
डीजीसीए ने शनिवार को इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स और मुख्य संचालन अधिकारी को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा। इंडिगो ने रविवार को जारी बयान में कहा कि उसकी मूल कंपनी इंटरग्लोब एविएशन के बोर्ड ने एक संकट प्रबंधन समूह बनाया है, जो स्थिति की निगरानी के लिए नियमित बैठकें कर रहा है। कंपनी के निदेशक बोर्ड ने कहा कि वे ग्राहकों की समस्याओं का समाधान करने और यात्रियों को रिफंड सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।
