नगर निगम कोरबा फिर एक बार अपनी कार्यशैली को लेकर विवादों में है, जिसकी शिकायत आयुक्त और जिला कलेक्टर से लेकर मुख्य सचिव, विभागीय सचिव, मंत्री और मुख्यमंत्री तक की गयी है । मामला है, निविदाओं में भ्रष्टाचार और विभागीय नियमों की धज्जिया उड़ाने का !
ताजातरीन मामला GEM( गवर्नमेंट ई मार्केट पोर्टल) में एल ई डी स्ट्रीट लाइट खरीदी हेतु बिड GEM/2026/B/7243190 28.02.2026 को लेकर सामने आया है जिसमें भ्रष्टाचार और विभागीय नियमों की अनदेखी किए जाने की शिकायत उच्च अधिकारियों से की गई है । बताया जाता है कि, संबंधित मामले निगम के अधिकारियों द्वारा निविदा निकालने से पहले ठेकेदार/ सप्लायर तय कर लिया गया था और उसके बाद सेटिंग में निविदा निकाली गयी । वर्तमान मामले में GEM में लाइट ख़रीदी की निविदा में विभागीय और शासन के निर्देशों को दरकिनार कर बिना विभागीय वेबसाइट uad.cg.gov.in में प्रसारित किए सेटिंग का खेल खेले जाने की बात कही जा रही है, जबकि नगरीय प्रसाशन का स्पष्ट निर्देश है की GEM सहित सभी टेंडरों को वेबसाइट uad.cg.gov.in में अनिवार्य रूप से अपलोड किया जाय । पिछले विधानसभा सत्र में आदिवासी विकास विभाग में 10 हज़ार में एक जग खरीदी का मामला सदन में गूंजा था, जिसके बाद शासन ने सख्त निर्देश जारी किए थे, ताकि अधिक से अधिक प्रतिस्पर्धीय मूल्य से सामग्री और सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें । साथ ही शासन ने अनावश्यक ATC (Additional Terms And Condition ) ना डाले जाने के कड़े निर्देश भी जारी किए थे, बावजूद इसके निगम के अधिकारी जो अपनी चर्चित कार्यशेली के लिए विख्यात हैं,नियमों को तोड़ मरोड़कर संबंधित निविदा में 27 पॉइंट की जटिल शर्तें समाहित कर ATC डालकर शासन की नियमों/ निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए GEM में टेंडर लगाये जाने की बात सामने आ रही है ।
संबंधितों ने बताया कि GEM के इस टेंडर के साथ साथ अनेकों टेंडर को इसी प्रकार भ्रष्टाचार की कढ़ाई में छानकर बाहर निकाला गया है और अपने चहेते ठेकेदारों से मिलकर भ्रष्टाचार होना बताया जा रहा है ।
भाजपा सरकार के दो साल बाद भी वर्षों से जमे कांग्रेसी बैकग्राउंड के अधिकारी निगम की सत्ता चला रहे हैं और अपना संगठित सिंडिकेट बना कर अपने पूर्व नियोजित ठेकेदारों मलाई खिलाकर शासन को चुना लगाया जा रहा है । ये कहना अतिशयोक्तिपूर्ण नहीं होगा कि, निगम ने विष्णु देव साय के सुशासन को नशीने में टांग कर “लाइन वहीं से शुरू होती है जहाँ से हम खड़े होते हैं “ की तर्ज़ पर काम कर रहा है । नियम कायदे कानून सब ताक पर है । आज सुशासन का नारा देनी वाली सरकार में उनके ही बनाये नियमों की धज्जियां उन्ही के अधीनस्थ अधिकारी खुले आम उड़ा रहे हैं ! शासन को भ्रमित और ग़लत जानकारी भेजी जा रही है । देखना है की शिकायत के बाद शासन प्रशासन क्या एक्शन लेता है, या फिर निगम में पूर्ववत अफसरशाही का रसूख बाहुबली के माहिष्मती साम्राज्य की तरह कायम रहता है !!

